

आँखें पलकें गाल भिगोना ठीक नहींछोटी-मोटी बात पे रोना ठीक नहींगुमसुम तन्हा क्यों बैठे हो सब पूछेंइतना भी संज़ीदा होना ठीक नहींकुछ और सोच ज़रीया उस को पाने काजंतर-मंत्र जादू-टोना ठीक नहींअब तो उस को भूल ही जाना बेहतर हैसारी उम्र का रोना-धोना ठीक नहींमुस्तक़बिल के ख़्वाबों की भी फिक्र करोयादों के ही हार पिरोना ठीक नहींदिल का मोल तो बस दिल ही हो सकता हैहीरे-मोती चांदी-सोना ठीक नहींकब तक दिल पर बोझ उठायोगे ‘परवाज़’माज़ी के ज़ख़्मों को ढ़ोना ठीक नहीं।

