Sunday, September 6, 2009

tasu 4 u




आँखें पलकें गाल भिगोना ठीक नहींछोटी-मोटी बात पे रोना ठीक नहींगुमसुम तन्हा क्यों बैठे हो सब पूछेंइतना भी संज़ीदा होना ठीक नहींकुछ और सोच ज़रीया उस को पाने काजंतर-मंत्र जादू-टोना ठीक नहींअब तो उस को भूल ही जाना बेहतर हैसारी उम्र का रोना-धोना ठीक नहींमुस्तक़बिल के ख़्वाबों की भी फिक्र करोयादों के ही हार पिरोना ठीक नहींदिल का मोल तो बस दिल ही हो सकता हैहीरे-मोती चांदी-सोना ठीक नहींकब तक दिल पर बोझ उठायोगे ‘परवाज़’माज़ी के ज़ख़्मों को ढ़ोना ठीक नहीं।

only 4 utasu







कोई दोस्त ऐसा बनाया जाये, जिसके आसुओं को पलकों में छुपाया जाए, रहे उसका मेरा रिश्ता कुछ ऐसा, की अगर वो रहे उदास तो हमसे भी न मुस्कुराया जाये आपने अपनी आँखों में नूर छुपा रखा है, होश वालो को दीवाना बना रखा है, नाज़ कैसे न करू आपकी दोस्ती पर, मुज जैसे नाचीज को खास बना रखा है... फूल सुख जाते है एक वक्त के बाद, लोग बदल जाते है एक वक़्त के बाद, अपनी दोस्ती भी टूटेगी एक वक़्त के बाद, लेकिन वोह वक़्त आयेगा मेरी मौत के बाद... हम दोस्ती में हद ए गुज़र जायेंगे , यह जिंदगी आपके नाम कर जायेंगे, आप रोया करेंगे हमे याद करके, आपके दामन में इतना प्यार छोड़ जायेंगे