Tuesday, October 18, 2011

4 some special



मुहब्बत है अजीब, आंखो में आँसू सजाये बैठे हैं ,
देवता नही है, फिर भी हम सपनो का मंदिर सजाये बैठे,
किस्मत की बात है, दुनिया से को खुद छुपाये बैठे हैं ,

कैसे बयां करें , उन पर हम अपना सब कुछ लुटाये बैठे हैखामोश दीवारों के वीराने को हाले दिल सुनाये बैठे हैंवो दूर है तो क्या, उनका दिल दिल से लगाये बैठे हैवो लौट कर न आयेगे, फिर भी नज़रे बिछाये बैठे हैउनसे मिलने की ललक में, सब कुछ भुलाये बैठे हैंआँखों से आँसू इतने गिरे , की समन्दर बनाये बैठे हैवो बेरहम , और उनके सजदे में सर को झुकाये बैठे है

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