Tuesday, October 18, 2011

4 my love AASHI


कोई इक खूबसूरत, गुनगुनाता गीत बन जाऊँ ।मेरी किस्मत कहाँ ऐसी, कि तेरा मीत बन जाऊँ॥तेरे न मुस्कुराने से, यहाँ खामोश है महफ़िल।मेरी वीरान है फितरत, मैं कैसे प्रीत बन जाऊँ।।तेरे आने से आती है, ईद मेरी औ दीवाली।तेरी दीवाली का मैं भी, कोई एक दीप बन जाऊँ।।लहू-ए-जिस्म का इक-इक, क़तरा तेरा है अब।सिर्फ इतनी रज़ा दे दे, मैं तुझपे जीत बन जाऊँ।।नाम मेरा भी शामिल हो, जो चर्चा इश्क का आये।जो सदियों तक जहाँ माने, मैं ऐसी रीत बन जाऊँ।।मुझसे देखे नहीं जाते, तेरे झुलसे हुए आँसू।मेरी फरियाद है मौला, मैं मौसम शीत बन जाऊँ।।कहाँ जाये खफा होके, 'मशाल' तेरे आँगन से।कोई ऐसी दवा दे दे, कि बस अतीत बन जाऊँ।।

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