Thursday, August 20, 2009



गुमसम तनहा बैठा होगासिगरट के कश भरता होगाउसने खिड़की खोली होगीऔर गली में देखा होगाज़ोर से मेरा दिल धड़का हैउस ने मुझ को सोचा होगासच बतलाना कैसा है वोतुम ने उस को देखा होगामैं तो हँसना भूल गया हूँवो भी शायद रोता होगाठंडी रात में आग जला करमेरा रास्ता तकता होगाअपने घर की छत पे बेठाशायद तारे गिनता होगा..............................

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