
गुमसम तनहा बैठा होगासिगरट के कश भरता होगाउसने खिड़की खोली होगीऔर गली में देखा होगाज़ोर से मेरा दिल धड़का हैउस ने मुझ को सोचा होगासच बतलाना कैसा है वोतुम ने उस को देखा होगामैं तो हँसना भूल गया हूँवो भी शायद रोता होगाठंडी रात में आग जला करमेरा रास्ता तकता होगाअपने घर की छत पे बेठाशायद तारे गिनता होगा..............................
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