
नहीं होगा असर उन पर कभी आंसू बहाने सेये शामे ग़म भी ढलती है कहीं दिल के जलाने से
हुजूमे ग़म से घबराकर तू ऐ दिल आह न भरनातुझे हँस कर उठाना है अताए ग़म जमाने से
तेरी काफिर निगाहें भी मुजस्सिम हैं क़यामत कीये बाज़ आए नहीं हुस्ने बुताँ बिजली गिराने से
मैं बादा कश नहीं यारो मगर ये कैफ छाया है
ग़मे जानाँ को दिलबर दिलनशीं अपना बनाने से
करम फरमा याँ तौबा सुरुरे चश्मे जानाँ कीबहक जाएँ न हम साक़ी कहीं मय के पिलाने से
"जलील" ऐसी ग़ज़ल छेड़ो की वो मजबूर हो जाएँ
सुना है वो नहीं आए सरे महफ़िल जमाने से
हुजूमे ग़म से घबराकर तू ऐ दिल आह न भरनातुझे हँस कर उठाना है अताए ग़म जमाने से
तेरी काफिर निगाहें भी मुजस्सिम हैं क़यामत कीये बाज़ आए नहीं हुस्ने बुताँ बिजली गिराने से
मैं बादा कश नहीं यारो मगर ये कैफ छाया है
ग़मे जानाँ को दिलबर दिलनशीं अपना बनाने से
करम फरमा याँ तौबा सुरुरे चश्मे जानाँ कीबहक जाएँ न हम साक़ी कहीं मय के पिलाने से
"जलील" ऐसी ग़ज़ल छेड़ो की वो मजबूर हो जाएँ
सुना है वो नहीं आए सरे महफ़िल जमाने से
No comments:
Post a Comment