
ये आंसुओ से तर हो सकते हैंरिश्ते और बेहतर हो सकते हैं
चंद सांसे अभी भी बाकी हैंमेरे नुख्से कारगर हो सकते हैं
हमें अब तक यकीं नहीं आयावो भी सितमगर हो सकते हैं
ये वक़्त का एक फलसफा हैफूल भी पत्थर हो सकते हैं
नुकसान की तो बात न करोये जनाब जानवर हो सकते हैं
दरख्त सूखने लगे अचानककई परिंदे बेघर हो सकते हैं
इस तरह मुलाक़ात की उसनेये चर्चे उम्र भर हो सकते हैं
अपने घर में कभी न सोचाहम भी बेक़दर हो सकते हैं
बात यकीं पे आके रुकती हैसायेबां सूखे शजर हो सकते हैं
कैफ़ियत यूँ ठीक नहीं अपनीतीर-ए-नज़र बेअसर हो सकते हैं
चंद सांसे अभी भी बाकी हैंमेरे नुख्से कारगर हो सकते हैं
हमें अब तक यकीं नहीं आयावो भी सितमगर हो सकते हैं
ये वक़्त का एक फलसफा हैफूल भी पत्थर हो सकते हैं
नुकसान की तो बात न करोये जनाब जानवर हो सकते हैं
दरख्त सूखने लगे अचानककई परिंदे बेघर हो सकते हैं
इस तरह मुलाक़ात की उसनेये चर्चे उम्र भर हो सकते हैं
अपने घर में कभी न सोचाहम भी बेक़दर हो सकते हैं
बात यकीं पे आके रुकती हैसायेबां सूखे शजर हो सकते हैं
कैफ़ियत यूँ ठीक नहीं अपनीतीर-ए-नज़र बेअसर हो सकते हैं
umda. blog jagat men swagat.
ReplyDeleteबहुत अच्छा लिखा है, भावुक है
ReplyDeleteबहुत सुन्दर !!!!!!!!!!1
ReplyDeleteचिट्ठाजगत में आपका स्वागत है.......भविष्य के लिये ढेर सारी शुभकामनायें.
गुलमोहर का फूल
सुंदर रचना के साथ स्वागत है
ReplyDelete"जनाब ये बात कुछ अच्छी नहीं लगी "
ReplyDeleteखैर आलोक उपाध्याय "नज़र" की तरफ से ....